gulmohar

भय

” हमने तुमको मना किया था ना कि राधा को हवेली मत भेजना, तुमने उसे कइसे भेज दिया” मातादीन अपनी पत्नी गुल्ली से बोल रहा था।
” अरे का हो गया,उ तो छोटी बच्ची है, और तुम खाना नहीं ले गए थे तो भेज दिया, उसमें का हो गया” गुल्ली ने जबाव दिया।
” पगला गई हो का,वो छोटी बच्ची नहीं रही, छोटे ठाकुर ने उसे देख लिया है अउर उसके बारे में पूछा रहे,अब का करी बताओ”
“पापा छोटे ठाकुर बहुत अच्छे हैं, हमसे बोले कि तुम कउन सी क्लास में हो, कोई हैल्प चाहिए तो हम तुमरी मदद करेंगे”राधा चहकती हुई बोली।
मातादीन ने राधा को एक थप्पड़ लगा दिया,” खबरदार जो दोबारा उस जगह पर आई,उ जगह जोन लोग जाते हैं फिर बापस नहीं आते,समझी का,अउर तुम महारानी दोनों बेटियों को ना संभाल कर रखो,इहा पर जंगल राज है,कब तुम्हारी बेटियों को कोई उठा कर ले जाएगा पता भी नहीं चलेगा”
राधा को समझ नहीं आया कि बापू ने उसकी पिटाई क्यों करी है।उसे तो छोटे ठाकुर बहुत अच्छे लगे थे।
मातादीन छोटे ठाकुर की गाड़ी का ड्राइवर था और अपने घर वालों को सख्त हिदायत दी हुई थी कि हवेली कोई भी ना आए, चाहें घर में कोई मर भी जाए तब भी हवेली की तरफ रुख ना करें,पर उसकी बारह बरस की बेटी उसे खाना देने हवेली पहुंच गई और छोटे ठाकुर ने उसे देख भी लिया।
मातादीन मन-ही-मन घबरा रहा था कि आज उसके लिए कोई फ़रमान जारी होगा,पर कुछ नहीं हुआ।
दो महीने बीत गए, मातादीन थोड़ा रिलेक्स हो गया था कि राधा तो अभी बहुत छोटी है और शायद छोटे सरकार राधा के बारे में भूल गए हैं। उसने चैन की सांस ली और राधा को दोबारा स्कूल जाने की इजाजत दे दी।
एक महीने बाद एक दिन राधा घर नहीं आई।एक हफ्ता बीत गया, बहुत ढूंढा, और एक दिन राधा की लाश झाड़ियों में मिली, नग्नावस्था में।
गुल्ली रो रही थी,” यह सब उस छोटे ठाकुर का काम है,हम पुलिस को बता देंगे सब”
” चुप,जबान काट देंगे, अगर दोबारा यह बात जुबान पर आई तो,उ अन्नदाता है हमारे,हम छोटे लोग हैं,वो बहुत बड़े समझी का” मातादीन गुस्से में बोला
” काहे, तुम को तो पता है कौन किया इ सब” गुल्ली ने कहा
” हां पता है”
” फिर सच काहें नहीं बोल रहें”
” अपनी दुसरी बेटी को बचाना है ना तो चुप रहो” मातादीन ने आंसू पोंछे,” आगे से कभी भी दोबारा हवेली पर मत आना”
” अब”गुल्ली अभी भी रो रही थी।
” अब का भूल जाओ सब और अपनी छोटी बेटी पर ध्यान दो”मातादीन ने कहा और चला गया छोटे ठाकुर की गाड़ी चलाने।

पिंकी खुराना, प्रसिद्ध लेखिका, चंडीगढ़

9 thoughts on “भय”

  1. बहुत मार्मिक रचना है । इतने अच्छे लेखन के लिए बहुत बहुत बधाई 🎊

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