
हेमा जोशी “स्वाति” लोहाघाट (उत्तराखंड)
चौदह वर्ष वनवास पूर्ण कर,
राम अयोध्या आए हैं।
घर-घर दीप जले खुशियों के,
दीवाली मनाई है।
आज अवधपुरी में फिर से,
त्रेतायुग यह आया है।
दीप उजालों के जलाकर,
अंधकार मिटाया है।
सजी रंगोली हर द्वारे पर,
तोरण द्वार सजाया है।
सरयू के पावन तट पर देखो,
अगणित दीप जलाए हैं।
सिया-लखन संग रघुकुल नंदन,
रथ सवार हो आए हैं।
नैनों में खुशियाँ भर आईं,
तन-मन सब हर्षाए हैं।
राम नाम की महिमा पावन,
पाप-ताप का नाश हुआ।
आज अवध के कण-कण में है,
उत्सव अमृत बरस रहा।
आज दिलों में दीप जलाकर,
प्रेम का संदेश जगाएँ।
चरणों में श्रीराम के जाकर,
आओ हम सब शीश नवाएँ।
घर-घर हो दिवाली ऐसी,
राग-द्वेष का नाम न हो।
रामराज आए यहाँ पर,
हम सबका कल्याण हो।
