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सविता मीरा: एक मुलाकात से बनी खूबसूरत तिकड़ी

सविता मीरा के जन्मदिन पर नीलम सिंह का आत्मीय संस्मरण

आज लाइव वॉयर न्यूज प्रसिद्ध लेखिका सवितासिंह मीरा (जमशेदपुर) के जन्म दिवस पर विशेष सामग्री के रुप में उनके मित्रों के संस्मरण प्रस्तुत कर रहा है

नीलम पेड़ीवाल ‘विहाँगी’

कुछ मुलाकातें बस परिचय तक सीमित नहीं रहतीं, वे धीरे-धीरे जीवन की स्मृतियों का हिस्सा बन जाती हैं. सविता जी से मेरी पहली मुलाकात भी ऐसी ही थी.सविता सिंह मीरा जी से मेरी पहली मुलाकात 28 जुलाई 2022 को तुलसी भवन में आयोजित सावन मिलन कार्यक्रम में हुई थी. पहली ही मुलाकात में उनका अपनापन मन को छू गया. उनके साथ बिताया वह समय आज भी यादों में ताजा है.
घर आने के बाद उनका पहला मैसेज आया-खूबसूरत डीपी नीलम जी. मैंने आपको फेसबुक पर रिक्वेस्ट भेजी है.
सविता …मेरा सहज-सा जवाब था कौन सविता?
उनका उत्तर आया- सविता मीरा.
एक मिनट के लिए मैं सोच में पड़ गई कि एक ही व्यक्ति के दो नाम कैसे हो सकते हैं!
उस दिन तुलसी भवन के सावन मिलन कार्यक्रम में मैंने नृत्य किया था और सविता जी ने मेरे नृत्य का वीडियो बनाया था. मैंने उन्हें वीडियो के लिए धन्यवाद दिया तो उनका जवाब आया-क्या डांस! और कितनी प्यारी हैं आप!
उनके ये शब्द सुनकर मैं फूली नहीं समाई. शायद बातचीत की वही छोटी-सी शुरुआत आगे चलकर एक आत्मीय जुड़ाव में बदल गई.


आज भी कई लोग हम दोनों को देखकर भ्रमित हो जाते हैं कि सविता कौन हैं और नीलम कौन! सच कहूँ तो इस उलझन में भी एक अलग ही मजा है.
इसके बाद अनेक मंचों, प्रतियोगिताओं और साहित्यिक प्रस्तुतियों के दौरान मुलाकातें होती रहीं. मेरी प्रिय सखी पूनमजी के साथ सविताजी भी हमारी संगत का अभिन्न हिस्सा बनती गईं. देखते ही देखते हम तीनों की एक ऐसी खूबसूरत तिकड़ी बन गई, जिसकी अपनी ही पहचान है.
सविता जी से मिली प्रेरणा
सविता जी से हमने साहित्य ही नहीं, बल्कि लोगों को साथ लेकर चलने की कला भी सीखी है. साहित्य के प्रति उनका गहरा ज्ञान, सक्रियता और नए लोगों को प्रोत्साहित करने का उनका स्वभाव हमेशा प्रभावित करता है.
वे हमारी प्रतिभा पर भरोसा करती हैं और जब भी अवसर मिलता है, हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं. किसी दूसरे की उपलब्धि को बिना किसी संकोच के स्वीकार करना और उसके लिए उत्साहित होना उनके व्यक्तित्व की खासियत है.इसका सबसे सुंदर अनुभव मुझे उस समय हुआ, जब मुझे और मेरी प्रिय सखी पूनम सिंह को इंदौर में साहित्यकार सम्मान प्राप्त करने के लिए आमंत्रित किया गया था. किसी कारणवश सविता जी हमारे साथ इंदौर नहीं जा पाईं, लेकिन हमारी यात्रा से लेकर सम्मान समारोह तक की हर खबर वे लेती रहीं. हमारी उपलब्धि को लेकर उनका उत्साह देखते ही बनता था.
हमारे सम्मान की खबर को उन्होंने अनेक समाचार पत्रों के माध्यम से लोगों तक पहुँचाया. उस अवसर पर मुझे महसूस हुआ कि किसी अपने की उपलब्धि को अपना उत्सव मानना ही स्नेह की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति है.
मीरा नाम से अपनी पहचान
जमशेदपुर और कई स्थानों पर मीरा के नाम से पहचानी जाने वाली सविता जी का व्यक्तित्व सहज और मिलनसार है. उनकी मुस्कान में ऐसा अपनापन है कि सामने वाला सहज ही उनसे जुड़ जाता है. सबसे मिल-जुलकर रहना, सबको साथ लेकर चलना और वातावरण में सकारात्मकता बनाए रखना उनकी खूबसूरत आदत है. शायद इसी वजह से लोग उनकी ओर सहज ही आकर्षित होते हैं. जैसे मैं और मेरी सखी पूनमजी हुए.

मेरी जिंदगी में सविता जी का आना मेरे लिए किसी सुखद संयोग से कम नहीं है. कुछ संबंध परिचय से आगे बढ़कर परिवार जैसा अपनापन दे जाते हैं. सविता जी मेरे लिए ऐसी ही सखी और बड़ी बहन हैं.
आज उनके जन्मदिन के अवसर पर ईश्वर से मेरी यही प्रार्थना है कि सविता जी का जीवन खुशियों, प्रेम, स्वास्थ्य, सम्मान और साहित्यिक उपलब्धियों से भरा रहे.उनकी मुस्कान हमेशा बनी रहे, उनके शब्दों की मिठास बरकरार रहे और उनकी सकारात्मक ऊर्जा यूँ ही आसपास के लोगों को प्रेरित करती रहे. सविता जी, आप जैसी सखी का मिलना मेरे और पूनम जी के लिए सचमुच सौभाग्य है.हमारी यह खूबसूरत तिकड़ी यूँ ही बनी रहे. हमारी हँसी-मजाक, साहित्यिक यात्राएँ, मंच की यादें और साथ बिताए पल जीवनभर स्मृतियों की सबसे खूबसूरत किताब के पन्ने बने रहें.

लाइव वॉयर न्यूज की ओर से भी जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएँ, सविता जी.
यूँ ही मुस्कुराती रहिए और अपने आसपास के संसार में अपनी आत्मीयता की रोशनी बिखेरती रहिए.

suresh parihar

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वायर न्यूज़, पुणे

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