
चन्द्रवती दीक्षित
बड़ा ही पावन, सार्थक अहसास,
उपलब्धता में नव-निर्माण की धार।
चाहत नहीं किसी से रखे,
आत्मनिर्भरता से सुखी जीवन-संसार।
दुर्भावना से कोसों दूर,
लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित।
स्वयं का अटल भरोसा,
आत्मनिर्भरता में सदा आशातीत।
मानवता ही केंद्र-बिंदु,
खुद की ताकत का संतुलन।
धरा-गगन-सा अनुपम धैर्य,
नकारात्मकता का विघटन।
सुख-दुःख का विशुद्ध समायोजन,
सृष्टि के नियमों का पालन।
एक-दूजे की निश्छल प्रेरणा,
जीवन-नैया का अनुशासन।
