रातभर चला सफाई अभियान, 400 सफाई मित्रों ने घाटों से समेटे लाखों दीप; अब इन्हीं से तैयार होंगी ‘वेस्ट-टू-आर्ट’ डिजाइन
उज्जैन। दीपोत्सव की रोशनी बुझने के बाद उज्जैन के घाटों पर सफाई का ऐसा अभियान चला, जिसने पूरे आयोजन को एक अलग पहचान दे दी। क्षिप्रा नदी के घाटों, कार्तिक मेला प्रांगण और महाकाल महालोक में रिकॉर्ड संख्या में दीप जलाए जाने के बाद नगर निगम के 400 से अधिक सफाई मित्र पूरी रात सफाई में जुटे रहे। सुबह श्रद्धालु घाटों पर पहुंचे तो अधिकांश घाट साफ-सुथरे नजर आए।
गुरुवार को सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित दीपोत्सव में हजारों वॉलंटियर्स, विभिन्न संगठनों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया था। शाम 7 बजे दीप प्रज्ज्वलित किए गए। इसके करीब एक घंटे बाद नगर निगम की टीम ने सफाई अभियान शुरू कर दिया।
नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा के निर्देश पर सात सेक्टरों में विशेष रात्रिकालीन स्वच्छता अभियान चलाया गया। सफाई मित्रों ने घाटों से दीपक और अन्य सामग्री एकत्र की। जहां तेल फैल गया था, वहां चूने के पाउडर का इस्तेमाल कर सफाई की गई।
कचरा नहीं, कला का कच्चा माल
दीपोत्सव के बाद एकत्र किए गए दीपों को सीधे कचरा मानकर नष्ट करने के बजाय उनके पुन: उपयोग की योजना बनाई गई है। कार्तिक मेला प्रांगण में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए दीप और अन्य सामग्री एकत्र की गई। बचे हुए तेल और अन्य अवशेषों की भी सफाई की गई।
नगर निगम के अनुसार, दीपोत्सव के बाद करीब 33 लाख दीपक एकत्र हुए हैं। इन्हीं दीपों से ‘वेस्ट-टू-आर्ट’ के तहत आकर्षक डिजाइन तैयार की जाएंगी। बाद में इन डिजाइन को विभिन्न स्थानों पर स्थापित किया जाएगा।
इस तरह दीपोत्सव के बाद बची सामग्री को कचरे में बदलने के बजाय उसका रचनात्मक इस्तेमाल करने की तैयारी है। यानी जिन दीपों ने रात में घाटों को रोशन किया, वही अब शहर की नई कलाकृतियों का हिस्सा बनेंगे।
