
डॉ. संजुला सिंह “संजू” जमशेदपुर
भाद्रपद आया, तीज है आई
भक्ति की बरसात लिए,
हरियाली के संग-संग आई
मन में नई प्रभात लिए।
शिव के नाम की ज्योति जले
और पार्वती का ध्यान रहे,
मन में श्रद्धा, तन में साधना,
अधरों पर मुस्कान रहे।
पार्वती सा तप हो मन में,
शिव सा धैर्य सदा साथ रहे,
जीवन की हर कठिन डगर पर,
विश्वासों का हाथ रहे।
आशाओं के झूले झूलें,
मन में गूँजे मधुर मल्हार,
मेहंदी रची हथेली बोले,
रहे प्रेम यही हर बार।
‘तीज’ न केवल श्रृंगार है,
यह मन का है संस्कार,
त्याग-तपस्या, प्रेम-समर्पण,
है नारी का यही संसार।
शिव में शक्ति, शक्ति में शिव,
यही सनातन ज्ञान है,
दोनों मिलकर रचते जग में
जीवन का कल्याण है।
व्रत तो सफल तभी होगा
जब मन में निर्मलता आए,
द्वेष मिटे और प्रेम खिले,
हर आँगन मंदिर हो जाए।
आओ ‘तीज’ मनाएँ ऐसी,
मिटे उर का अँधियारा,
शिवत्व जगे हर हृदय में
और जीवन हो उजियारा।
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बहुत सुंदर ❤️