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करोड़पति नहीं, मगर हौसला जीता

कौन बनेगा करोड़पति के ऑडिशन के लिए दिल्ली पहुँची महिला की प्रेरक कहानी करोड़पति बनने का सपना पूरा नहीं हुआ, लेकिन KBC तक पहुँचने की पहली कोशिश ने हौसला जरूर जीत लिया.

कौन बनेगा करोड़पति तक पहुँचना भी किसी करोड़पति बनने से कम नहीं

पूनम सिंह वत्सला, जमशेदपुर

यह बात 31 मई 2025 की है।

मैं टीवी पर सोनी चैनल पर ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के सवाल देखती थी। एक दिन मन में विचार आया कि क्यों न मोबाइल में सोनी ऐप डाउनलोड करके मैं भी इन सवालों के जवाब दूँ?

मैंने ऐप डाउनलोड किया, रजिस्ट्रेशन किया और खेलना शुरू कर दिया।

कई दिनों तक मैं सवालों के जवाब देती रही। फिर एक दिन अचानक मेरे फोन की घंटी बजी। दूसरी तरफ से ‘कौन बनेगा करोड़पति’ का नाम सुनाई दिया। आजकल फोन पर इतने फ्रॉड कॉल आते हैं कि मुझे लगा शायद यह भी कोई धोखाधड़ी होगी। मैंने फोन नहीं उठाया।

दो दिन बाद फिर फोन आया।

इस बार मैंने सोचा, एक बार उठाकर देख लेते हैं कि आखिर मामला क्या है।

फोन उठाते ही मुझसे कहा गया कि ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के लिए मेरा चयन हुआ है। मुझसे कुछ सवाल पूछे जाएंगे और अगर मेरे जवाब सही हुए तो मुझे ऑडिशन के लिए दिल्ली बुलाया जाएगा।

मैंने हामी भर दी।

इसके बाद मुझसे तीन सवाल पूछे गए। मैंने उनके जवाब दिए और मैं अगले चरण के लिए चुन ली गई।

फिर मुझे बताया गया कि 31 मई को शाम 6 से 8 बजे के स्लॉट में मेरा ऑडिशन है और इसके लिए मुझे दिल्ली पहुँचना होगा।

मेरे सामने सबसे बड़ी मुश्किल थी—सिर्फ तीन दिन का समय।

मैंने तो घर में किसी को यह तक नहीं बताया था कि मैं मोबाइल पर ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के सवालों के जवाब देती हूँ।

अब समझ नहीं आ रहा था कि इतनी जल्दी दिल्ली जाने की व्यवस्था कैसे होगी।

जब मैंने घर वालों को बताया तो उन्होंने मेरी बात को हँसी में टाल दिया।

“छोड़ो, कुछ नहीं होगा।”

लेकिन दूसरी बार फोन आने के बाद मेरे मन ने फैसला कर लिया था।-मुझे जाना है।

मैंने अपने बड़े बेटे से बात की। उसने मेरी बात सुनी और कहा—

“माँ, तुम्हारी इच्छा है तो तुम जरूर जाओ। जो होगा, देखा जाएगा। तुम टेंशन मत लो।”

उसकी बातों ने मुझे हिम्मत दी।

उसने मेरे लिए हवाई जहाज की टिकट बुक की और मैं दिल्ली के लिए रवाना हो गई।
रास्ते भर मन में उठते रहे सवाल

दिल्ली जाते हुए मेरे मन में तरह-तरह के सवाल उठ रहे थे।

क्या सच में ऑडिशन होगा?

कहीं यह झूठ तो नहीं?

मेरे साथ कुछ गलत तो नहीं होगा?

मैं अकेली जा रही थी और मुझे कुछ भी ठीक से पता नहीं था।

मेरा बेटा लगातार फोन करके मेरा हाल पूछता रहा और हर पल की जानकारी लेता रहा। उसकी चिंता और भरोसे ने मुझे भीतर से मजबूत बनाए रखा।

दिल्ली में मेरे एक कजिन भाई रहते थे। उन्होंने अपने बेटे को एयरपोर्ट पर मुझे लेने के लिए भेज दिया।

लेकिन मैंने उसे भी नहीं बताया कि मुझे ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के ऑडिशन के लिए बुलाया गया है।

मन में डर था कि कहीं बात सुनकर कोई मजाक न करने लगे।

मैंने बस इतना कहा कि मुझे ऑडिशन के लिए एक जगह जाना है। तुम मुझे वहाँ तक पहुँचा दो।

वह मुझे वहाँ छोड़कर अपने ऑफिस चला गया और कह गया कि ऑडिशन खत्म होने पर मुझे फोन कर देना, वह मुझे लेने आ जाएगा।

कुछ देर बाद उसने देखा कि वहाँ बहुत बड़ी भीड़ है। ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के ऑडिशन के लिए लोगों की लंबी कतार लगी हुई थी।

उसने मुझे फोन करके कहा-“बुआ, घबराइएगा मत। यहाँ बहुत लोग हैं। आराम से ऑडिशन दीजिएगा। मैं शाम को आपको लेने आ जाऊँगा।”

सामने थी लोगों की लंबी कतार

वहाँ का दृश्य देखकर मैं खुद घबरा गई।

कई लोग अपना सामान लेकर रात से ही बाहर बरामदे में बैठे थे। कोई दूर-दराज से आया था तो कोई अपने परिवार के साथ।

कई परिवारों के पाँच-पाँच सदस्य तक आए हुए थे।

इतनी भीड़ और इतनी लंबी कतार देखकर मेरे मन में आया—

“बाप रे! अब क्या होगा?”

मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि लाइन कहाँ से शुरू हो रही है और कहाँ खत्म।

फिर मैंने भी एक लाइन में जाकर जगह बना ली।

किसी ने पूछा, “कहाँ से आई हैं?”

मैंने कहा, “जमशेदपुर, टाटानगर से।”

फिर उन्होंने मेरी स्लॉट के बारे में पूछा।

मैंने बताया कि मेरा स्लॉट शाम 6 से 8 बजे का है।

उन्होंने कहा, “मैडम, आप तीसरे नंबर के गेट पर चली जाइए।”

मेरे मोबाइल में रजिस्ट्रेशन नंबर देखा गया और मुझे अंदर प्रवेश मिल गया।

ऑडिशन सेंटर के अंदर

अंदर कई टेंट लगे हुए थे और उनमें बड़ी संख्या में लोग बैठे थे।

हम सभी को एक जगह बैठाया गया।

फिर घोषणा हुई कि दस-दस लोगों की लाइन बनाई जाएगी।

हमें स्टीकर लगाया गया और नंबर दिया गया।

मेरा नंबर था—826।

इसके बाद मुझे एक डायरी दी गई और उसे भरने के लिए कहा गया।

डायरी में एक सवाल था—

आपकी जिंदगी में ऐसी कौन-सी घटना रही है, जिसे आप लिखना चाहेंगी?

कम से कम 100 से 150 शब्दों में।

मेरे पास बैठी उत्तर प्रदेश की एक लड़की ने बताया कि वह दूसरी बार ऑडिशन देने आई है। उसने कहा कि पहली बार वह बहुत कंफ्यूज थी।

उसने मुझसे कहा कि अपनी जिंदगी की कोई दुखद घटना लिखिए। उसका मानना था कि ऐसी कहानी चयन में मदद कर सकती है और कार्यक्रम की दृष्टि से भी रोचक हो सकती है।

मैं सोचने लगी—आखिर मैं क्या लिखूँ?

काफी सोचने के बाद मैंने अपनी जिंदगी की एक छोटी-सी घटना लिख दी।
अब बारी थी परीक्षा की

इसके बाद हमें अंदर बुलाया गया।

दस-दस लोगों का टेस्ट हो रहा था।

हम सब अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

उस दिन लिखित परीक्षा के साथ मौखिक परीक्षा भी होनी थी।

प्रश्न-पत्र मिला। उत्तर लिखने के लिए ओएमआर शीट दी गई और साफ निर्देश दिया गया कि ओवरराइटिंग नहीं होनी चाहिए।

हम सभी अपने-अपने सवाल हल करने में जुट गए।

तभी पहली बार महसूस हुआ कि जिस प्रतियोगिता को हम टीवी पर बैठकर आसान समझते हैं, उसके पीछे कितनी मेहनत और तैयारी होती है।

हम आपस में बात कर रहे थे—

“पता नहीं क्या होगा।”

“कितने सवाल सही होंगे?”

“चयन होगा या नहीं?”

मैं भी भीतर से थोड़ी घबराई हुई थी।

तभी हाथ में एक कागज लिए एक व्यक्ति कमरे में आया और नंबर बोलने लगा।

एक-एक करके नंबर पुकारे जा रहे थे।

और अचानक मैंने अपना नंबर सुना।

826।

मैंने लिखित परीक्षा पास कर ली थी।

उस क्षण मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था।

मुझे लगा, शायद भगवान ने चाहा है कि मैं यहाँ तक पहुँचूँ।
लेकिन सफर अभी खत्म नहीं हुआ था

लिखित परीक्षा पास करने के बाद मुझे बताया गया कि अभी मुझे रुकना होगा।

उसी रात मेरी वापसी की टिकट थी।

लेकिन उस समय मैं इतनी खुश थी कि मुझे अपनी ट्रेन तक याद नहीं रही।

अब एक और परीक्षा सामने थी—मौखिक परीक्षा।

एक बार फिर मन में सवाल उठने लगे—

अब क्या होगा?

क्या मैं इसमें भी सफल हो पाऊँगी?

मुझे अंदर बुलाया गया।

मुझसे तीन सवाल पूछे गए।

मैंने दो सवालों के सही जवाब दिए।

लेकिन तीसरे सवाल का जवाब मुझे नहीं मालूम था।

सवाल यूरोप से संबंधित था और मुझे उस विषय की पर्याप्त जानकारी नहीं थी।

मैं चुप रह गई।

इसके बाद मुझसे पूछा गया—

“आपकी जिंदगी का सबसे बुरा वक्त कौन-सा रहा है?”

मैं फिर सोच में पड़ गई।

मैं क्या बताऊँ?

मेरी जिंदगी में ऐसा कोई बड़ा दुख नहीं था, जिसे मैं कहानी बनाकर सुना सकूँ।

मुझे याद आया कि किसी ने मुझे सलाह दी थी कि अपनी जिंदगी की कोई बहुत दुखद घटना बताना बेहतर होगा।

लेकिन मैं झूठ नहीं बोलना चाहती थी।

इसलिए मैंने वही छोटी-सी घटना सुनाई, जो मैंने डायरी में लिखी थी।

मेरे पास कोई ऐसी कहानी थी ही नहीं, जिसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर सकूँ।
फिर आया इंतजार का वक्त

मुझसे कहा गया-“अगर आपका चयन होता है तो आपको फोन जाएगा।”

मैं कमरे से बाहर आ गई।

उम्मीद कम थी।

लेकिन मन के किसी कोने में एक छोटी-सी उम्मीद अभी भी बाकी थी।

शायद…

शायद मेरा फोन आए।

लेकिन फोन नहीं आया।

धीरे-धीरे मुझे समझ आ गया कि मेरा चयन नहीं हुआ।

एक पल के लिए मन जरूर उदास हुआ।

आखिर मैं इतनी दूर से आई थी, परीक्षा दी थी और सपने को एक कदम आगे ले जाने की उम्मीद लेकर पहुँची थी।

लेकिन फिर मैंने खुद से कहा—

कम से कम मैं यहाँ तक तो पहुँची।

कई लोग बार-बार कोशिश करने के बाद भी इस मुकाम तक नहीं पहुँच पाए थे।

मेरी तो यह पहली कोशिश थी।

और पहली ही कोशिश में मैं उस जगह तक पहुँची, जिसे मैंने कभी सिर्फ टीवी की स्क्रीन पर देखा था।
असली जीत क्या है?

उस दिन मुझे एक बहुत बड़ी बात समझ में आई।

हर प्रतियोगिता का मतलब केवल जीतना नहीं होता।

कभी-कभी किसी बड़े सपने की तरफ पहला कदम बढ़ाना ही जीत होती है।

कभी किसी अनजान शहर के लिए अकेले निकल पड़ना जीत होती है।

कभी डर के बावजूद किसी फोन कॉल का जवाब देना जीत होती है।

कभी भीड़ के बीच खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना जीत होती है।

और कभी-कभी असफल होने के बाद भी अपने चेहरे पर मुस्कान बनाए रखना सबसे बड़ी जीत होती है।

‘कौन बनेगा करोड़पति’ में मेरा चयन नहीं हुआ।

लेकिन इस सफर ने मुझे करोड़ों की एक सीख जरूर दी—

सपनों को उम्र की जरूरत नहीं होती।

उन्हें बस एक कोशिश चाहिए।

और कभी-कभी जिंदगी हमें उस मुकाम तक इसलिए नहीं पहुँचाती कि हमें वहाँ जीतना है, बल्कि इसलिए पहुँचाती है कि हमें खुद से मिलना है।

मैं करोड़पति नहीं बन सकी।

लेकिन उस दिन मैं अपने भीतर की उस हिम्मती औरत से जरूर मिली, जो डरती हुई भी दिल्ली चली गई, अनजान लोगों के बीच परीक्षा दी और पहली कोशिश में इतनी दूर तक पहुँची।

शायद यही मेरी असली जीत थी।

5 thoughts on “करोड़पति नहीं, मगर हौसला जीता”

  1. पूनम सिंह वत्सला जी ,
    आपने बहुत सादगीपूर्ण तरीके से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने की यात्रा का वर्णन किया और जितना हासिल हो सका उससे प्रेरणा लेकर आगे जाने का प्रण किया । बहुत अर्थपूर्ण और संवेदनशील अभिव्यक्ति ।
    अपने और संस्मरणों को भी वाणी दीजिए, आप ज़रूर सफ़ल होंगी ।

    1. वाह पूनम जी,वाह। बहुत बढ़िया। आपने बिना झिझक के एक संस्मरण के रूप में प्रस्तुत किया है। आपके हिम्मत की दाद देती हूँ। “कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती”। ईश्वर की असीम कृपा नित्य आप पर बरसती रहे। यशस्वी बनकर कीर्तिमान स्थापित करें।

  2. ऐसे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता जाना ही जिंदादिली है। ❤️👍

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