
सरिता डबराल, गाजियाबाद
दोस्ती नए अंदाज़ से जीना सिखाती है,
प्यार भरा मखमली एहसास कराती है।
किसी रस्म-रिवाज़ की मोहताज न होती है,
जादू की झप्पी में दर्द सारे भुला देती है।
कभी तकरार तो कभी इकरार होती है,
दूर होकर भी मिलने को बेकरार होती है।
यूँ तो मापने का कोई पैमाना नहीं होता,
हर सीमा, हर पैमाने से यह परे होती है।
तप्त धरा पर जल की फुहार होती है,
नहीं इसकी कोई भी मिसाल होती है।
हर कुर्बानी के लिए सदा तत्पर रहती है,
पक्की वाली दोस्ती कुछ ऐसी ही होती है।
ग़म आए तो पहले ही आँख नम होती है,
कंधे पर सर रखकर प्यार से सहलाती है।
मुश्किल हालात में हमेशा साथ चलती है,
बिंदास जीने का अंदाज़ भी सिखाती है।
वक्त और हालात की परवाह न करती है,
हर हालात का सामना करना सिखाती है।
कभी डाँट तो कभी दुलार से समझाती है,
सच्ची दोस्ती किसी हाल में रोने न देती है।
