विद्यालय प्रबंधक डॉ. सुशीला तिवारी से डॉ. अनामिका दुबे की विशेष बातचीत

डॉ. अनामिका दुबे निधि, मुंबई
आज के प्रतिस्पर्धी दौर में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार, संस्कारी और आत्मनिर्भर नागरिक तैयार करना है जो समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक भूमिका निभा सकें. इसी सोच को साकार करने का कार्य कर रहा है त्रिमूर्ति हाई स्कूल (हिंदी माध्यम). विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नैतिक मूल्यों, अनुशासन और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के समन्वय के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है.
इन्हीं विषयों पर विद्यालय की प्रबंधक डॉ. सुशीला तिवारी से लाइव वॉयर न्यूज के लिए डॉ.अनामिका दुबे ने बातचीत की. प्रस्तुत हैं उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
प्रश्न 1. आपके अनुसार एक आदर्श विद्यालय की सबसे बड़ी विशेषता क्या होनी चाहिए?
उत्तर:-मेरे अनुसार एक आदर्श विद्यालय वह है जहाँ विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं, बल्कि उत्तम संस्कार, अनुशासन, नैतिक मूल्य, आत्मविश्वास और जीवन जीने की सही दिशा भी मिले. विद्यालय ऐसा वातावरण प्रदान करे, जहाँ प्रत्येक विद्यार्थी स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और प्रेरित महसूस करे तथा अपनी प्रतिभा का पूर्ण विकास कर सके.
प्रश्न 2. त्रिमूर्ति हाई स्कूल (हिंदी माध्यम) की स्थापना का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: त्रिमूर्ति हाई स्कूल की स्थापना का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, संस्कारयुक्त और मूल्यपरक शिक्षा उपलब्ध कराना है. हमारा प्रयास है कि प्रत्येक छात्र-छात्रा शिक्षा के साथ-साथ उत्तम चरित्र, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करे तथा भविष्य में एक सफल, संवेदनशील और जागरूक नागरिक बने.
प्रश्न 3. विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय में कौन-कौन सी गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं?
उत्तर : विद्यालय में नियमित अध्ययन के साथ खेलकूद, योग, सांस्कृतिक कार्यक्रम, भाषण एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ, निबंध लेखन, चित्रकला, विज्ञान प्रदर्शनी, पर्यावरण जागरूकता अभियान, राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन तथा विभिन्न रचनात्मक प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं. इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों का मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक और सामाजिक विकास सुनिश्चित किया जाता है.
प्रश्न 4. आज के समय में हिंदी माध्यम की शिक्षा को आप किस दृष्टि से देखती हैं?
उत्तर: हिंदी माध्यम की शिक्षा विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में विषयों को गहराई से समझने का अवसर देती है और उनका बौद्धिक आधार मजबूत बनाती है. आज प्रतियोगी परीक्षाओं, प्रशासनिक सेवाओं और अनेक क्षेत्रों में हिंदी का महत्व लगातार बढ़ रहा है. यदि आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के साथ हिंदी माध्यम की शिक्षा दी जाए, तो विद्यार्थी किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं.
प्रश्न 5. विद्यालय में अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर: विद्यालय में प्रार्थना सभा, प्रेरणादायक विचार, नैतिक शिक्षा, शिक्षकों के मार्गदर्शन, समूह गतिविधियों तथा अनुशासित वातावरण के माध्यम से विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार विकसित किए जाते हैं. हम बच्चों को सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, समय के महत्व, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व का व्यवहारिक प्रशिक्षण भी देते हैं.
प्रश्न 6. नई शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यालय में क्या परिवर्तन किए गए हैं?
उत्तर: नई शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यालय में गतिविधि-आधारित शिक्षण, अनुभवात्मक शिक्षा, कौशल विकास, भाषा दक्षता, रचनात्मक सोच, डिजिटल शिक्षा तथा विद्यार्थियों की रुचि और क्षमता के अनुसार सीखने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. हमारा उद्देश्य बच्चों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करना है.
प्रश्न 7. अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय के लिए विद्यालय क्या प्रयास करता है?
उत्तर: विद्यालय नियमित रूप से अभिभावक-शिक्षक बैठक () आयोजित करता है. इन बैठकों में विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, व्यवहार और आवश्यक सुधारों पर विस्तार से चर्चा की जाती है. आवश्यकता पड़ने पर व्यक्तिगत मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाता है, ताकि विद्यालय और परिवार मिलकर बच्चे के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकें.
प्रश्न 8. जो अभिभावक अपने बच्चों का प्रवेश त्रिमूर्ति हाई स्कूल में कराना चाहते हैं, उन्हें आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
उत्तर: मैं सभी अभिभावकों से कहना चाहूँगी कि बच्चों की शिक्षा उनके जीवन की सबसे मजबूत नींव होती है. त्रिमूर्ति हाई स्कूल में हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन, संस्कार और आधुनिक शिक्षण पद्धति का संतुलित वातावरण प्रदान करते हैं. हमें विश्वास है कि यहाँ प्रत्येक विद्यार्थी अपने व्यक्तित्व का सर्वश्रेष्ठ विकास करते हुए उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर होगा.
प्रश्न 9. विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए आपका प्रेरणादायक संदेश क्या है?
उत्तर: प्रिय विद्यार्थियों, हमेशा बड़े सपने देखिए, नियमित अध्ययन कीजिए, अनुशासन का पालन कीजिए और अपने माता-पिता तथा शिक्षकों का सम्मान कीजिए. कठिन परिश्रम, ईमानदारी और आत्मविश्वास सफलता की सबसे बड़ी कुंजी हैं. सीखना कभी मत छोड़िए, क्योंकि ज्ञान ही वह शक्ति है जो आपको जीवन की हर ऊँचाई तक पहुँचा सकती है.
डॉ. सुशीला तिवारी का मानना है कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब वह विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ संस्कार, आत्मविश्वास, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व भी प्रदान करे. यही सोच त्रिमूर्ति हाई स्कूल (हिंदी माध्यम) की पहचान है, जो आधुनिक शिक्षा और भारतीय मूल्यों के संतुलन के साथ नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है.
