राँची में सजा शब्दों का महाकुंभ

साहित्य संकल्प राँची इकाई की प्रथम ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में शामिल कवि और साहित्यकार

साहित्य संकल्प की प्रथम ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में गूँजी स्वर लहरियाँ

रांची से अर्पणासिंह की रिपोर्ट

राँची, 29 अप्रैल

साहित्य संकल्प, राँची इकाई द्वारा प्रथम ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार अवसर साबित हुआ, जिसमें देशभर के रचनाकारों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।

गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. उर्मिला सिन्हा ने की। कार्यक्रम का संयोजन, संचालन एवं स्वागत उद्बोधन अर्पणा सिंह ‘अर्पी’ ने कुशलतापूर्वक किया। मंच के संस्थापक आदित्य अविरल की गरिमामयी उपस्थिति, शुभकामनाएँ एवं प्रस्तुति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम का शुभारंभ पूनम वर्मा द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ, जबकि धन्यवाद ज्ञापन रश्मि सिन्हा ने किया। काव्य गोष्ठी में विभिन्न रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ किया।
डॉ. उर्मिला सिन्हा ने “मोबाइल का जमाना”, अर्पणा सिंह ने “इंसा हो तो इंसा से प्यार करो”, आदित्य अविरल ने “चैन अंदर नहीं बाहर नहीं”, पूनम वर्मा ने “कितना प्यारा था हमारा बचपन”, निर्मला कर्ण ने “स्त्री सोच के अबला बन गई आज की नारी”, रश्मि सिन्हा ने “इस दुनिया में हम सब मुसाफिर हैं”, रिम्मी वर्मा ने “लेखनी तेरा साथ मुझे सुकून देता है”, सुनीता श्रीवास्तव जागृति ने “एक शिल्पी और उसका हाथकरघा”, राकेश रमण ने “ये दिन तुम्हारा है यह रात तुम्हारी है”, डॉ. लोकेश शर्मा ने “ठौर-ठौर दरक गई धरती की छाती” तथा सुनीता अग्रवाल ने “तो क्या हुआ जीवन एक संघर्ष है” जैसी प्रभावशाली रचनाएँ प्रस्तुत कीं। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. उर्मिला सिन्हा ने सभी रचनाओं की विस्तृत व्याख्या करते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि साहित्य संकल्प की प्रथम ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में शामिल सभी रचनाकारों के नाम साहित्यिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित किए जाएंगे।

सभी उपस्थित सदस्यों ने आयोजन का भरपूर आनंद लिया और इसे सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह गोष्ठी साहित्य के प्रति प्रेम, जुड़ाव और सृजनशीलता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सराहनीय पहल सिद्ध हुई।

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