
डॉ. संजुला सिंह ” संजू”जमशेदपुर
दिल की तन्हाई को कवि
कविता बना लेते हैं,
दर्द जब हद से गुजरता है
तो मंचों पे गा लेते हैं।
कवि के मीठे, बड़े सुरीले
रसधार भाव होते हैं,
माला शब्दों को जोड़कर
बड़े सुंदर बना देते हैं।
दिल पे बड़े ज़ख्म खा-खा के
ही ये कवि बनते हैं,
इसीलिए तो दर्द औरों के
आसानी से समझ लेते हैं॥
करोगे लाख तुम कोशिश
इन्हें समझने की,
समझ न पाओगे कभी भी
ये इतने माहिर होते हैं॥
इनकी हर बात में होती
समंदर सी गहराई,
ये कभी हल्की कोई बात
नहीं करते हैं।
इनकी कविता लिखना तो
एक बहाना है,
अपनी कविता के माध्यम से
ज़ख्म छुपाते हैं।
“संजू” पढ़ती है इनकी कविता
को बड़े दिल से,
जग में जीना कैसे जीवन है,
ये सिखाते हैं॥

वाह क्या बात है 👌