
अंजू गुप्ता, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)
कभी बेटी सी लगती है, कभी माँ बन जाती है
मुझे मेरी काली माँ मे हर रिश्ते की झलक मिल जाती है
कभी बन कर सहेली वो मेरे संग मुस्कुराती है,
कभी पिता सा गुस्सा दिखा मुझे बुराइयों से बचाती है
कभी प्रेमी सी लगती मुझको, मेरे मन में प्रीत जगाती है
उनके आलौकिक चेहरे से मेरी नजरे हट नहीं पाती है
कभी रोना कभी हसना कभी रूठना कभी मनाना,
ये सब ही है हमारे रिश्ते का फ़साना
कभी मैं उनको मनाती हूँ, कभी वो मुझको मनाती है
ज़ब से मिली है जीवन में,
मेरे अंदर एक शक्ति जागी है,
बहुत खुसनशीब हूँ मैं
मेरे अंदर माँ काली की भक्ति जागी है
कभी जो उदास होकर,
मैं रोते रोते सो जाती हूँ
सपने में उस दिव्य शक्ति के,
मैं दर्शन पाती हूँ
कहती है मुझसे मेरी काली माँ,
क्यों रोती है तुझे किस बात का गम है
ये तेरी काली माँ तेरे कदमो के साथ चल रही हर दम् है
मुझे तेरी भक्ति पाकर सब कुछ है मिल गया माँ
तेरी इस नादान सी बेटी का रूप है खिल गया है माँ
पर कई बार मन घबराता है,
तू छोड़ कर ना चली जाए
तेरी बेटी का हाथ ये ख्याल मुझको डराता है
मुझसे कोई गलती हो,
माफ़ी झोली में भर देना
माँ अपनी इस बेटी पर
ममता की छाया कर देना
पागल हूँ नादान हूँ मैं,
पूजा पाठ भी आता नहीं
पर कसम इस जीवन की माता,
तेरा ख्याल कभी दिल से जाता नहीं
तू ही मेरा दोस्त,
तू ही मेरी बहन,
तू ही मेरा प्रेम,
तू ही मेरी माई है
देख तेरे लिए ये अन्जु
पूरी दुनिया छोड़ कर आई है।
लेखिका के बारे में
अन्जु गुप्ता
एक संवेदनशील हृदय वाली शिक्षिका और सशक्त रचनाकार हैं, जिनकी लेखनी में भावनाओं की गहराई और समाज की सच्चाई झलकती है।08 अक्टूबर 1989 को जन्मी अन्जु जी ने हिंदी विषय में स्नातकोत्तर (MA) तथा बी.एड. कर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। वर्तमान में वे पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, सेवक रोड (सिलीगुड़ी) में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। उनके जीवन में शिक्षा और साहित्य दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। कविता, कहानी और लघुकथा के माध्यम से वे अपने विचारों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। महिला काव्य मंच, शिक्षा मंच और चैतन्य काव्य मंच से जुड़कर वे साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनकी रचनात्मकता को पश्चिम बंग हिंदी अकादमी द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।साथ ही, खबर समय न्यूज चैनल ने उन्हें “कलमकार 2025” सम्मान से नवाजा है। लेखन के अलावा उन्हें अध्यापन, नृत्य और गायन में भी गहरी रुचि है। एक समर्पित माँ, जिम्मेदार शिक्षिका और प्रतिभाशाली लेखिका के रूप में अन्जु गुप्ता प्रेरणा का सशक्त उदाहरण हैं।
ये रचनाएं भी पढ़ें और अपनी प्रतिक्रियाएं जरुर दें
अंतर्मन की वेदना
“हाय… क्या हो रहा है…
करुणा सागर
उजाले की ओर
बढ़ती महंगाई
रूदन नहीं हुंकार चाहिए
अहंकार
