करुणा सागर

बांसुरी बजाते हुए वृंदावन में खड़े श्रीकृष्ण का दिव्य और शांत स्वरूप

अंशु गुप्ता, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)

हे कृष्ण तुम लो अवतार,
भक्तन बुलावे तुम्हे बार बार,
मेरे स्वामी करुणा सागर,
मीरा के तुम गिरधर नगर,
हड़का धन्य हुई तुम्हे पाकर,
बनी जोगन मैं भक्ति में जाकर,
सुंदर नयन कोमल अधर,
कमल चरण सुंदर मूरत,
गोकुल का ग्वाल ,
राधा का श्याम
रुक्मणि का प्यारा,
जामवंती का न्यारा,
सत्यभामा का सत्य मेरा प्रिय
सुभद्रा का भ्राता,
तुम द्वारकादिश राधे का प्रीत,
ध्रुव की चाह तुम ,
प्रह्लाद की प्यास तुम,
बाली के लिए वामन रूप
भक्त के लिए नरसिंह स्वरूप,
नारद भजते सूर लिखते ,
कभी अच्युत कभी चतुर्भुज,
कभी कर्मा की खिचड़ी चखते ,
तो कभी शबरी के बैर खाते,
विधुर के घर का भोजन तुम्हारा ,
अर्जुन सिख गीता रचते,
द्रोपदी की लाज तुम,
भक्तों का प्यार तुम,
है मधुसूदन लो अवतार,
मैं देखने को तत्पर तुम्हारा कल्कि अवतार,
पुकारे मेरा मन प्रियतम,
हर्लो तुम सारा तम,
मैं तो तुम्हारी रज दीवानी,
हृदय में उतरी भक्ति की कटारी,
कृष्ण प्रिया अंशु कहे आओ न स्वामी..

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