Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

रिवाज़ और रिश्तों की रखवाली

एक भारतीय परिवार का भावनात्मक दृश्य जिसमें दादा-दादी, माता-पिता और एक बेटी पारंपरिक माहौल में साथ खड़े हैं; बेटी आदरपूर्वक बुजुर्गों के चरण स्पर्श कर रही है, घर में स्नेह, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों का वातावरण दिखाई दे रहा है।

लक्ष्मी सिंह ‘रूबी’ जमशेदपुर (झारखंड)

घर में कायम हमें अपने रिवाज़ रखना है,
बेटियों की यहाँ महफ़ूज़ लाज रखना है।

है किताबों से बड़ा इनका तजुर्बा यारो,
इन बुज़ुर्गों का भी कायम लिहाज़ रखना है।

मुल्क के वास्ते कुर्बान हो गए हँसकर,
उन शहीदों पे हमेशा ही नाज़ रखना है।

कामयाबी के लिए हो गया ज़रूरी ये,
साथ में अब हमें सारा समाज रखना है।

भूलकर भी न तोड़िए कभी अपना वादा,
राज़ की बातों को हमको तो राज़ रखना है।

अपने माथे का पसीना है मिल्कियत अपनी,
अब कहाँ पास हमें तख़्त-ओ-ताज रखना है।

भूलकर भी किसी को मत कहो बुरा मानव,
बस इसी सोच का हमको मिज़ाज रखना है।

One thought on “रिवाज़ और रिश्तों की रखवाली

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *