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यमुना में हादसा या सिस्टम की विफलता ?

वृन्दावन नाव हादसा: य

नदी नहीं, लापरवाही बनी हादसे की वजह : वृन्दावन से उठते बड़े सवाल

डॉ. रुपाली गर्ग, मुंबई

यह दर्दनाक हादसा वृन्दावन में यमुना नदी में हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया।

जिम्मेदारी किसकी?
यह एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि कई स्तरों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

वृन्दावन जैसे धार्मिक स्थलों पर अक्सर भीड़ बहुत अधिक होती है, लेकिन: नावों की संख्या, क्षमता और सुरक्षा की सही निगरानी नहीं होती लाइफ जैकेट, रजिस्ट्रेशन, और लाइसेंस जैसी चीज़ें सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह जाती हैं क्षमता से ज़्यादा लोगों को बैठाना
तेज़ गति/गलत नियंत्रण, यात्रियों की चेतावनी अनसुनी करना।
* हादसे के तुरंत कारण में सबसे बड़ी भूमिका यहीं दिखती है।
* अगर नियम कड़ाई से लागू होते, तो जोखिम काफी कम हो सकता था।
ओवरलोड नाव में बैठ जाना ,लाइफ जैकेट न पहनना/न मांगना। सुरक्षा निर्देशों को हल्के में लेना
* यह कड़वा है, पर जागरूकता की कमी भी हादसों को बढ़ाती है।

सच्चाई यह है कि-जब जिम्मेदारी बंटी होती है, तब जवाबदेही खो जाती है।
सरकार नियम बनाती है, पर पालन ढीला होता है।संचालक कमाई देखते हैं, सुरक्षा नहीं ।जनता जोखिम को नजरअंदाज करती है।

नदी नहीं थी क्रूर यहाँ,
न लहरों का था दोष,
लालच, लापरवाही ने मिलकर
लिख डाला यह रोष।



-यह लेखिका के अपने विचार है,संपादक का इससे सहमत होना जरुरी नहीं है.

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