लोग घर की खूँटी पर टांग कर निकलते हैं संवेदना…
और फिर उन्हें नहीं फर्क पड़ता
सड़क किनारे हो रहे हादसों से
एक युवक बार बार घोप रहा है
हाथ में लिये अपने औजार को
किसी युवती पर जो तड़प रही है दर्द से…
लोग एक दूसरे को देखते हैं
की शायद कोई तो अपनी संवेदना लेकर आया होगा जो पहल करेगा
और आगे बढ़कर उस युवक का हाथ पकड़ लेगा और लड़की की तड़प कम हो जायेगी…
पर सभी पाते हैं कि
किसी ने भी संवेदना को खूँटी पर टाँग कर आने में भूल नहीं की है…
सबकी संवेदना घर पहुंचकर पुनः खूँटी से वापस लेने के बाद ही जागेगी…
अभी वो वहीं आराम कर रही है…
सभी टटोलते हैं एक दूसरे को और
आगे बढ़ जाते हैं…
वो युवती दम तोड़ देती है सभी के समक्ष…
शाम को वो सभी घर लौटकर
संवेदना से भर उठते हैं और
फिर पोस्ट करते हैं
जस्टिस फॉर गर्ल
और इस तरह से मानवता का धर्म निभा लेते हैं…
सीमा मधुरिमा , लखनऊ

समाप्त होती संवेदनाओ का चित्रण
बिल्कुल सही