कॉपी, किताब, नोटबुक्स टैक्स फ्री और रॉ मटेरियल पर 18 % जीएसटी

सरकार ने हाथ घुमा कर जोर से कान दबा दिया, बिलबिला रहे हैं कॉपी-किताब निर्माता !

इंदौर से वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा की रिपोर्ट

इंदौर । सरकारी प्रचार तंत्र भले ही जीएसटी दरों को कम करने को देश में उत्सवी माहौल बताए लेकिन हकीकत में कुछ व्यापारी खुश नहीं है। कॉपी, नोटबुक्स, किताब निर्माताओं से तो किसी ने जानने की कोशिश ही नहीं की है कि 22 सितंबर से लागू जीएसटी की नई दरें उनका तनाव क्यों बढ़ा रही हैं।निर्माता वर्ग की पीड़ा है सरकार ने बस घोषणा ही की है, हमारा कान तो पीछे से पकड़ कर जोर से दबा दिया है।

अलग अलग राज्यों में जब वेट लगता था तब मप्र में कापी, नोट बुक्स पर नहीं था किंतु बाद में शुरु हो गया। 2017 से कॉपी, किताब, नोटबुक्स पर 12 प्रश जीएसटी लगने लगा। 22 सितंबर से केंद्र सरकार ने कापी, नोट बुक्स, किताब को टैक्स फ्री कर दिया लेकिन कवर, प्रिंटिग, बाइंडिंग, लेमिनेशन जैसे रॉ मटेरियल पर पहले 12 फीसदी लगता था (निर्माता 12% जीएसटी लगा कर दुकानदार को बेच देता था।) अब सरकार ने इस रॉ मटेरियल पर जीएसटी की दर में 6 प्रतिशत की वृद्धि कर 18 % कर दिया है। देश की प्रमुख कॉपी निर्माता कंपनी डोम्स, हिंदुस्तान पेंसिल्स, क्लासमेट ने एमआरपी तो कम की लेकिन थोक विक्रेताओं को डिस्काउंट भी कम कर दिया।

कॉपी-किताब अब 6-8 % महंगी हो जाएंगी
विक्रेताओं का कहना है एमआरपी से 60 % डिस्काउंट होता था। अब एमआरपी कम करने पर डिस्काउंट कम हो जाएगा। किताबे जीएसटी में जीरो परसेंट थी लेकिन किताब के कागज पर जीएसटी 12 से अब 18 % हो गया। प्रिंटिग पर पहले 5 प्रश जीएसटी लगता था, जो अब 18 % कर दिया गया है। इससे कॉपी-किताब की लागत 6-10 % तक बढ़ जाएगी।
-60 रु एमआरपी वाली रॉयल कॉपी (172 पेज) मैन्युफेक्चर्र रिटेलर को 25 रु में देते थे। रिटेलर उसे 35 से 40 रु तक बेच देता था।
-75 से 80 रु एमआरपी वाली ए फोर कॉपी 172 पेज, रिटेलर को 38 से 40 में, रिटेलर 60 रु से अधिक तक में बेचता था।
-160 रु एमआरपी वाली स्पॉयरल कॉपी 300 पेज, रिटेलर को 90 में, रिटेलर 120-130 रु तक बेचता था। इन सब पर 6 से 8 फीसद की वृद्धि होने का कारण सरकार द्वारा रॉ मटेरियल पर राहत नहीं देना है।

जीएसटी आयुक्त से मिल कर उन्हें परेशानी बताई है-यशभूषण जैन

इंदौर पुस्तक विक्रेता संघ के अध्यक्ष यशभूषण जैन ने कहा जीएसटी आयुक्त धनराजू एस से पेपर ट्रेड एसोसिएशन, इंदौर अभ्यास पुस्तिका संघ और पुस्तक प्रकाशक विक्रेता संघ के पदाधिकारी मिले थे। ज्ञापन देकर समस्या बताई है, उन्होंने जीएसटी कॉउंसिल तक बात पहुंचाने का आश्वासन दिया है। अन्य शहरों के संगठनों ने भी केंद्रीय वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन दिए हैं। हम सरकार के रुख का इंतजार कर रहे हैं।

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