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उज्जैन में शरद जोशी की स्मृति में व्यंग्य गोष्ठी

साहित्यकारों ने उनके योगदान को किया याद

उज्जैन, 9 सितम्बर
मध्यप्रदेश लेखक संघ उज्जैन द्वारा हिन्दी व्यंग्य के प्रख्यात हस्ताक्षर शरद जोशी की स्मृति में आयोजित व्यंग्य गोष्ठी में साहित्य जगत के कई वरिष्ठ लेखक और व्यंग्यकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन प्रेस क्लब, उज्जैन में किया गया, जिसमें व्यंग्यकारों ने शरद जी के अद्भुत साहित्यिक योगदान और उनके सामाजिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार और विक्रम विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा ने कहा कि शरद जोशी सम्पूर्ण व्यंग्य परम्परा के विलक्षण व्यंग्यकार थे। उनके व्यंग्य में विषयों का वैविध्य था और वे आम जीवन के सामान्य विषयों को भी बड़े प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते थे। उन्होंने कहा कि सामाजिक पाखण्ड के विरुद्ध शरद जी हमेशा खड़े रहते थे और यदि कोई व्यंग्यकार कालजयी व्यंग्य रचना करना चाहता है तो उसे शरद जी से सीखना होगा।

सारस्वत अतिथि और वरिष्ठ मालवी कवि प्रो. शिव चौरसिया ने कहा कि साहित्यिक चेतना की दृष्टि से उज्जैन आज भी समृद्ध है। उन्होंने व्यंग्य की तुलना सूर और तुलसी की तरह करते हुए कहा, “हिन्दी साहित्य में जो नाम सूर-तुलसी का है, वही व्यंग्य में शरद जी का है।”

विशेष अतिथि और वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ. पिलकेंद्र अरोरा ने कहा कि हमारा प्रदेश व्यंग्य प्रदेश है और उज्जैन शहर व्यंग्य की राजधानी है। शरद जी स्वाभिमानी, साहसी और स्पष्टवादी व्यंग्यकार थे। उन्होंने यह भी याद किया कि टेपा सम्मेलन में शरद जी कई बार आए और वहां उन्होंने हास्य-व्यंग्य की फसल को लहलहाने का अवसर प्रदान किया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में मध्यप्रदेश लेखक संघ उज्जैन के अध्यक्ष प्रो. हरिमोहन बुधौलिया ने कहा कि पंडित सूर्यनारायण व्यास, शरद जोशी, परसाई जी और डॉ. शिव शर्मा जी की व्यंग्य परम्परा आज भी कायम है और नए व्यंग्यकारों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई है।

कार्यक्रम में अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व कुलपति प्रो. नागेश्वर राव और वरिष्ठ पत्रकार एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री प्रेमनारायण नागर उपस्थित रहे।

व्यंग्य पाठ सत्र में कई प्रतिष्ठित व्यंग्यकारों ने अपने रचनात्मक पाठ प्रस्तुत किए। इनमें शांतिलाल जैन, रमेशचन्द्र शर्मा, शशांक दुबे, मुकेश जोशी, डॉ. हरीशकुमार सिंह, डॉ. उर्मि शर्मा, डॉ. स्वामीनाथ पांडेय, राजेन्द्र नागर, राजेन्द्र देवधरे, संतोष सुपेकर, सूरज नागर, संदीप सृजन, डॉ. संदीप नाडकर्णी, डॉ. गिरीश पंड्या, डॉ. क्षमा सिसौदिया, प्रफुल्ल शुक्ल और अरुणेश्वरी गौतम शामिल थे। उपस्थित श्रोताओं ने व्यंग्य पाठ को खूब सराहा।

कार्यक्रम का आरम्भ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से किया गया। अतिथियों का स्वागत संयोजकों मुकेश जोशी, संदीप सृजन, संतोष सुपेकर, शशांक दुबे, राजेंद्र देवधरे और डॉ. संदीप नाडकर्णी ने किया।

साहित्यकार रमेशचन्द चंगेसिया, मानसिंह शरद, डॉ. पुष्पा चौरसिया, सीमा देवेन्द्र, नेत्रा रावणकर, श्वेतिमा निगम, अनिल कुरेल, दिलीप जैन और राजेश राज सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरीशकुमार सिंह ने किया और आभार मुकेश जोशी ने व्यक्त किया।

व्यंग्य गोष्ठी ने शरद जोशी की साहित्यिक यात्रा और उनके व्यंग्यकार रूप को याद कर उपस्थित साहित्यप्रेमियों के बीच हिन्दी व्यंग्य की धरोहर को जीवंत किया।

उज्जैन से लाइव वायर न्यूज के लिए डॉ. हरीशकुमार सिंह की रिपोर्ट

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