सावन की चूड़ियां: नवविधवा बहू और बड़की काकी

बहती संवेदना

सावन की फुहारों और रंग-बिरंगी चूड़ियों के बीच बुनी यह कहानी एक नवविधवा बहू के मन के सूनेपन और फिर से जागती उम्मीद की मार्मिक झलक दिखाती है, जहाँ जीवन अपने दर्द के साथ भी आगे बढ़ना सीखता है।

Read More

खतरनाक मृगतृष्णा

पति की आंखों का अंधकार चित्रा के जीवन में भी इस तरह उतर आया था….. वह सब कुछ जानते समझते हुए भी……समझना नहीं चाह रही थी । कुछ दिनों के लिए ही सही पर एक जिंदगी जी ली उसने ।
लेकिन इस छलावे की जिंदगी ने उसे ताउम्र कारावास भुगतने के लिए मजबूर कर दिया ….

Read More

चरित्रहीन

जानकी ने चारपाई का सहारा लिया, पर पाँव डगमगा गए। गले में फाँस-सी अटकी थी, आँखें सूखी होकर भी जल रही थीं। सफ़ाई देने को शब्द नहीं थे, और सुनने वाला भी कौन था? घर की चौखट लाँघते ही उसके कदम रात के सन्नाटे को चीरती ट्रेन की चीख में खो गए—आज उस चीख में शामिल थी एक और चीख।

Read More