gulmohar
बरसों बाद कलम उठाकर कविता लिखती महिला कवयित्री

आत्मसंतुष्टि

बरसों बाद जब रेणू ने कलम उठाई, उसके दिल और दिमाग में अजीब सी मस्ती फैल गई। शब्दों का सागर उसके भीतर गोते लगा रहा था, और दिमाग उस सागर से मोती चुनकर उन्हें पंक्तियों में सजाने में व्यस्त था। भावनाओं की लहरें उठ रही थीं, और उसकी नाव—जो कविता का रूप धारण कर चुकी थी—उन लहरों को पार कर रही थी। हर शब्द, हर भाव उसे आत्मसंतुष्टि के द्वार तक ले गया। रेणू ने महसूस किया कि लिखना केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि आत्मा की शांति का साधन भी है। उसकी नाविक बनकर, वह अपनी रचनात्मकता की शक्ति को महसूस करते हुए आत्मसंतुष्टि के द्वार पर पहुँच गई।

Read More