चाँदनी में खोया दिल

आज की रात चाँदनी बहुत मतवाली है। चाँद भी मानो सोच रहा हो कि उसकी तो अपनी दीवाली है। साँझ ढलते ही माँ घर में चुप हैं और सोच रही हैं कि अपने परिवार के लिए क्या पकाएँ, क्योंकि रोटी का तवा खाली है। वहीं हमदम भी यह सोच रहा है कि आस-पास बिखरा लाल रंग उसकी प्रिय की लाली का प्रतीक है। मैं जब उसे देखता हूँ, तो महसूस करता हूँ कि खुद को ही भूल गया हूँ। ‘कनक’ अब इश्क़ में कंगाल हो चुका है, लेकिन यह मतवाली चाँदनी और प्रेम की लाली सब कुछ बयां कर देती है।

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 औरत…

औरत अपने भीतर अनगिनत भावों और संवेदनाओं को समेटती है। उसकी आँखों में उफनते समंदर को वह बाँध देती है, और दिल में उमड़ने वाले सैलाब को रोक लेती है। उसके ज़ेहन में कई विचार घूमते हैं, नस-नस में खामोशी दौड़ती है, और कश्मकश में उसकी रातें बेहिसाब बीतती हैं।

जीवन में आए पुरुष – पिता, भाई, पति या बेटा – उनके दुख, दर्द, बुराइयाँ, कहानियाँ और कई राज़ वह अपने सीने में दफ़्न कर लेती है। इतने सब कुछ होने के बावजूद, समाज अक्सर यह कहता है कि औरत के पेट में कोई बात नहीं छिपती। लेकिन सच यह है कि औरत अपने भीतर पूरा ब्रह्मांड समेटे हुए है।

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