खिड़की के पास खड़ा एक व्यक्ति, आंखों में आंसू और दूर किसी की याद में डूबा हुआ भावनात्मक दृश्य

रूबरू एहसास

एक अरसा बीत गया उससे मिले हुए, लेकिन वह हर पल, हर सांस में किसी अनकही बातचीत की तरह मौजूद रहा। उसकी उपस्थिति इतनी गहरी थी कि शब्दों को रोकने की कोशिश के बावजूद, आँखें सब कुछ कह गईं। जीवन और मृत्यु के बीच का फर्क भी जैसे धुंधला पड़ गया जो खो गया, वही भीतर कहीं जीवित हो उठा।

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