जो ठहर गए, वही असली कहानी हैं

सत्तर वर्ष की उम्र में जीवन ने सिखाया कि लोग आते-जाते रहते हैं, कुछ बसंत की तरह उजास और उम्मीदें लाते हैं, कुछ शीत की आँधी की तरह चले जाते हैं। युवावस्था में हर विदाई पीड़ादायक लगती थी, लेकिन समय और अनुभव ने यह समझाया कि जो लोग आपके लिए बने हैं, वे हमेशा लौटकर आते हैं। असली खुशी और जीवन की कहानी उन लोगों में है जो आपके साथ ठहरते हैं, आपकी आत्मा को समझते हैं और बिना किसी जोर-जबरदस्ती के आपके जीवन में बने रहते हैं।

Read More

वो इस जमाने का ही रहा…

मेरे हिस्से में हवाओं का  कुछ कतरा ही रहा सांस चलती रहे बस इतना मिलता रहा  मेरे मर्म से गुजरता वो  सुबह शाम रहा कभी ठहरा कभी नाकाम रहा  आदतन वो इस  जमाने का ही रहा मुंतजिर क्यों रहूं  जो कहीं और चला जबकि पता है वो  किसी का भी न रहा थपेड़ों से घायल…

Read More