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अपनी राह पर अकेले खड़ा व्यक्ति, जो समाज की परवाह किए बिना आगे बढ़ रहा है

बढ़े जा रहे हो किस ओर

जीवन की राहें कठिन ज़रूर लगती हैं, पर हर कदम उम्मीद पर ही आगे बढ़ता है। सपनों और अपनों की दिशा में अब तक उठे कदम हमेशा सही राह पर ले गए हैं, इसलिए विश्वास है कि आगे भी यही होगा। राहें मुश्किल हों तो क्या, अगर डटे रहें तो पार की जा सकती हैं। मंज़िल हर किसी को पानी है, मगर अक्सर लोग लंबी दूरी से घबरा जाते हैं। अंततः वही लोग मंज़िल तक पहुँचते हैं, जिनके हौसलों में बड़ी उड़ान होती है।

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