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कॉलेज की भीड़ में अकेला और मानसिक तनाव से जूझता एक युवा छात्र।

भीड़ में अकेला

“भीड़ में अकेला” एक संवेदनशील हिंदी कहानी है, जो युवाओं के भीतर चल रहे मानसिक संघर्ष, सामाजिक दबाव और संवाद की कमी को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है। यह कहानी बताती है कि समय पर समझ, प्रेम और संवाद किसी की जिंदगी बदल सकते हैं।

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शांत प्राकृतिक वातावरण में झील किनारे बैठी एक युवती, जो गहरे विचारों में डूबी हुई आत्म-चिंतन कर रही है

गहराइयों में छिपी सच्चाई

डॉ. रुपाली गर्ग, मुंबई जीवन की सच्चाई अक्सर सतह पर नहीं, उसकी गहराइयों में छिपी होती है। इसे समझने के लिए हमें कभी-कभी ठहरकर अपने भीतर झांकना पड़ता है। मेरे जीवन में भी एक ऐसा ही अनुभव आया, जिसने मुझे जीवन की गहराई से परिचित कराया। यह उन दिनों की बात है जब सब कुछ…

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