कैक्टस
जूही दी की कहानी सिर्फ एक स्त्री की नहीं, बल्कि उन अनगिनत महिलाओं की दास्तान है जो रिश्तों को निभाते-निभाते खुद को खो देती हैं. जीवन भर उपेक्षा और भावनात्मक पीड़ा सहने के बाद जब बीमारी ने उनके शरीर को जकड़ लिया, तब भी उनके भीतर स्वाभिमान जीवित रहा. “कैक्टस” की तरह चुभते रिश्तों के बीच जीती हुई जूही दी अंततः एक ऐसे निर्णय के सामने खड़ी थीं, जहां दर्द से मुक्ति और आत्मसम्मान की रक्षा ही उनकी अंतिम इच्छा बन गई.
