वो ही माँ बनाने को मन करता है

एक नंगी ईंट की दीवार और उसके पास चूल्हा, जिस पर उपले की आँच में रोटियाँ सिकती हैं। माँ के पास चिमटा तो है, फिर भी कभी-कभी ऐसा लगता है कि उसके जीवन से कुछ पल चुराए जाएँ। उसकी तपती ज़िंदगी, खुरदरी हथेलियाँ और जीवन की सारी सिलवटें यह सब गहरी कहानियाँ बयां करती हैं। समय तो गुजर चुका है, लेकिन जो आँसू उसने छुपाए थे, उन्हें समझने और पोछने की इच्छा रहती है। यह एक नज़दीकी और भावनात्मक दृष्टिकोण है, जिसमें माँ के संघर्ष और उसके भीतर छुपी कोमलता दोनों ही सामने आती हैं।

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राहें और मंज़िल

हर व्यक्ति की मंज़िल एक ही होती है, पर रास्ते अलग-अलग होते हैं। कोई सीधा लिफ्ट लेकर अपनी मंज़िल तक पहुँच जाता है, तो कोई धैर्य और परिश्रम के साथ सीढ़ियाँ चढ़ता है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो पहले स्वयं सीढ़ियाँ बनाते हैं और फिर उसी पर चढ़कर अपनी ऊँचाई तक पहुँचते हैं। अंततः सबको अपनी-अपनी राह चुननी पड़ती है। तय करना होता है कि कौन-सा रास्ता उसका है, और फिर बिना रुके, बिना थके बस आगे बढ़ते जाना होता है। जो कदम बढ़ाता है, वही मंज़िल तक पहुँचता है।

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कर्म की सीख…

सफलता आस्था को और प्रबल कर देती है . पंडित जी ने दोनों के जन्मांक देखें और पहले लड़के से कहा – कि वह इस बार अवश्य अधिकारी बन जाएगा और दूसरे लड़के से कहा- तुम्हारे ग्रह नक्षत्र कमजोर हैं, इसलिए तुम्हें किसी अन्य व्यवसाय पर ध्यान देना चाहिए.
१० वर्ष की आस्था भविष्य के आकलन को समझ नहीं पाती, परंतु वह दादा से कहती है कि मेरे विद्यालय में यह बताया जाता है, कि परिश्रम से भाग्य बनता है .आप सभी को परिश्रम से विमुख क्यों कर रहे हो?

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 विश्वास…

जब व्यक्ति अपने विवेक पर अटूट विश्वास रखता है और परिस्थितियों से लड़ने का साहस जुटाता है, तब वह कठिन परिश्रम और अनुशासन के पालन से अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है। धैर्य और आशा का संबल, असफलताओं से न घबराना और सही दिशा में सतत प्रयास करना सफलता की गारंटी बनते हैं। समयबद्धता का सम्मान, ज्ञान पर भरोसा और हौसला बनाए रखना, मुश्किल घड़ियों में भी व्यक्ति को झुकने नहीं देता। अच्छे कर्मों से व्यक्ति का नाम रोशन होता है, और जब लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रहता है, तो सफलता की राह स्वतः प्रशस्त हो जाती है।

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