Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

फूलों की माला, हवा का राग”

“हर्षित धरा, हर्षित अंबर, कोहरे की विदाई, भौंरे और तितलियों की मुस्कान। दहकते पलाश, हरे-हरे परिधान, पीली सरसों की सजती दुकान। गेहूँ और चने की झूमती बाली, कोयल की मतवाली कूक। अमलतास की झूलती डालियाँ, फूलों की माला लिए प्रीत खड़ी है द्वार पर—सारी धरती बसंत से प्यार में डूबी हुई।”

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अमर बेल-सी है ज़िंदगी

ज़िंदगी अमर बेल की तरह है। यह अपने आप पनप उठती है, चाहे घर में ही क्यों न पड़ी हो। सूखती नहीं, बल्कि मिट्टी की तलाश करती है जहाँ अपना हरित तत्व फैला सके। इसमें खुद को समाप्त करने की प्रवृत्ति नहीं होती। नन्हीं-नन्हीं कोमल पत्तियाँ निकल आती हैं और बेल की लताएँ सूखी-मुरझाई डंडियों को भी ढक लेती हैं।

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