कि मुझे सब याद है

…कि मुझे सब याद है

वह उन जगहों, एहसासों और यादों से दूर भागना चाहती है, जहाँ कभी उनका साथ था। फिर भी सच यही है कि सब कुछ बारिशें, स्पर्श, वादे और वो पल उसके भीतर अब भी ज़िंदा हैं। लेकिन वह चुप रहना चुनती है, क्योंकि कुछ यादें कह देने से नहीं, छुपा लेने से बचती हैं।

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ख़्वाब बुनती रात कविता रात और सपनों की भावनात्मक हिंदी रचना

ख़्वाब बुनती रात

“ख़्वाब बुनती रात” एक संवेदनशील कविता है, जो रात के सन्नाटे में जन्म लेती भावनाओं, सपनों और कल्पनाओं को शब्दों में ढालती है। यह कविता दिल और ज़ेहन के बीच चल रहे अनकहे संवाद को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत करती है।

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