सर्द हवाओं का मंजर था,
तन्हाई का खंजर था,
बेइंतहा दर्द था और उनकी यादों का लंगर था।
कविताएँ तो बस कविताएँ लगती थीं, पर उन शब्दों में मैंने एक आदमी का पूरा अकेलापन पढ़ लिया।
और आज जब उसने पूछा “आपका नाम?”
मैंने बस इतना कहा-“नंदा।” और उसकी आँखों में अचानक सदियों की चुप्पी उतर आई।