जो ठहर गए, वही असली कहानी हैं

सत्तर वर्ष की उम्र में जीवन ने सिखाया कि लोग आते-जाते रहते हैं, कुछ बसंत की तरह उजास और उम्मीदें लाते हैं, कुछ शीत की आँधी की तरह चले जाते हैं। युवावस्था में हर विदाई पीड़ादायक लगती थी, लेकिन समय और अनुभव ने यह समझाया कि जो लोग आपके लिए बने हैं, वे हमेशा लौटकर आते हैं। असली खुशी और जीवन की कहानी उन लोगों में है जो आपके साथ ठहरते हैं, आपकी आत्मा को समझते हैं और बिना किसी जोर-जबरदस्ती के आपके जीवन में बने रहते हैं।

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माँ का पीतल का संदूक

माँ का पीतल का संदूक—छोटा, पर सोने-सा चमकता। उसमें सहेजे गए गहने, सिक्के, पान और यादें पीढ़ियों की परंपरा और स्नेह का दीप हैं। बचपन से मुझे खींचने वाला यह संदूक अब मेरी नई यादों और ज्वेलरी का घर बन गया है।

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