एक विरह ऐसा भी…
वियोग के उस क्षण में कवि को उसकी आँखों में प्रेम और आत्मीयता दोनों दिखाई देते हैं। बिछड़ते समय दोनों ने कुछ न कुछ खोया था. एक ने उदासी को सहा, दूसरे ने निश्चय को अपने होंठों पर थामे रखा। इस टूटते हुए रिश्ते के बीच भी कवि के भीतर एक मौन विश्वास जन्म लेता है कि प्रेम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
