gulmohar

नन्ही रोशनी…

“वह छोटी सी बच्ची बिना कुछ कहे मुझे व्यवस्थित रहना सिखा रही थी।कभी माँ जैसी समझाती, कभी दोस्त सी हँसी बिखेरती, और कभी बेटी सी बाँहों में समा जाती। शायद नन्ही मेरे जीवन में भगवान की भेजी हुई वो रोशनी थी,जिसने मेरी तन्हाई को घर बना दिया।”

Read More

छप्पन वर्ष

“पचपन नहीं… छप्पन बरस हो गए हमारी शादी को।”वृद्धा ने हँसते हुए कहा, और वृद्ध भी मुस्करा दिए। सुबह से ही फोन की ट्रिन-ट्रिन ने उन्हें परेशान किया था, पर अब समझ आया. यह बच्चों की शुभकामनाओं की आवाज़ें थीं।
यादों की परतें खुलीं—इलाहाबाद के दिन, बच्चों की हंसी, कंधों पर बैठा कर दिखाई गई चौकी, रजाई के भीतर की मूँगफली… और आज वही बच्चे हिसाब मांगते हैं, शिकायतें करते हैं। पर इस सुबह आदित्य के गुलदस्ते और अर्चना की हंसी नेवृद्ध दंपति की आँखों को बारिश की बूँदों-सा चमका दिया।

Read More