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सूर्यास्त के समय एक सूफी साधक और एक स्त्री प्रेम व आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बनकर खड़े हैं, चारों ओर दिव्य प्रकाश।

हाँ, मैंने भी की है मुहब्बत

हाँ मैंने भी की है मुहब्बत कविता’ प्रेम को केवल एक भावना नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का उत्सव मानती है। मीरा की बगावत, राधा की इबादत और इंसानियत के संदेश से सजी यह कविता बताती है कि सच्चा इश्क़ हर धर्म और हर सीमा से ऊपर होता है।

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