क्या मैं बहक गई थी…?

मैं बहक गई थी और यह मानने में मुझे कोई अफ़सोस नहीं। जब मुझे सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, तब मेरा पति मुझसे दूर था। उसी खालीपन में एक पुराना प्यार फिर से सामने आया, जिसने मुझे वह अपनापन दिया जो मैं भूल चुकी थी। उस एक सच ने हमारी शादी को तोड़ा नहीं, बल्कि उसे आईना दिखा गया।

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रह गया तो रह जाने दो

जीवन क्षणभंगुर है, और प्यार भी कुछ लम्हों का होता है। कभी-कभी साथ रहते हुए भी पल दूर हो जाते हैं। यादें, थोड़ी खुशी और थोड़े ग़म के साथ, हमें हर पल जीना सीखना होता है। जो आज है, वह कल नहीं रहेगा, इसलिए हर अनुभव को पूरी गहराई से महसूस करना ही जीवन का सार है।

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