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मैं तुम्हें सोचता रहता हूँ…

यह कहानी प्रतीक्षा के उस नाज़ुक क्षण की दास्तान है, जहाँ प्रेम शब्दों से पहले मौन में पलता है। किताबों, कॉफी-हाउस और बारिश में भीगे स्वीकार के बीच, एक स्त्री वर्षों तक एक वाक्य के सहारे जीती रहती है—“I am well thinking of you always.” यह केवल स्वीकार नहीं, बल्कि संकोच, भय और आत्म-संयम को पार कर प्रेम को आवाज़ देने की कथा है।

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