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रथ के पास खड़े सूर्यपुत्र कर्ण का गंभीर और चिंतनशील स्वरूप, जो अपनी नियति और पहचान के संघर्ष को दर्शाता है।

कर्ण की व्यथा

‘कर्ण की व्यथा’ महाभारत के महान योद्धा सूर्यपुत्र कर्ण के मन में छिपे उस दर्द को शब्द देती है, जहाँ जन्म, पहचान, रिश्ते और नियति के बीच उनका अकेलापन मुखर होकर सामने आता है। यह कविता पाठकों को कर्ण के अंतर्मन से जोड़ती है।

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