Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
भारतीय पारंपरिक वेशभूषा में सजी नवविवाहिता अपनी माँग में सिंदूर धारण किए हुए, जीवनसाथी के साथ प्रेम, विश्वास और वैवाहिक समर्पण के भाव को दर्शाती हुई।

सिंदूर तेरे नाम का

“सिंदूर तेरे नाम का” प्रेम, विश्वास और आजीवन समर्पण की भावनाओं को व्यक्त करती एक भावपूर्ण हिंदी कविता है। इसमें जीवनसाथी के साथ जन्म-जन्मांतर के बंधन, अटूट विश्वास और साथ निभाने की कामना को कोमल शब्दों में पिरोया गया है। कविता भारतीय वैवाहिक संस्कृति में सिंदूर के आध्यात्मिक और भावनात्मक महत्व को भी सुंदरता से अभिव्यक्त करती है।

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अधूरी ख्वाहिश..

गर्मी के एक दोपहर में, सुदीप बनर्जी के अंतिम संस्कार की तैयारी हो रही है। निधि, जो अपने पति अमितेश के उपेक्षात्मक और हिंसक व्यवहार से वर्षों से जूझ रही है, यह घोषणा करती है कि मुखाग्नि सुदीप का बेटा सुजीत देगा—एक सच्चाई जिसे अब तक कोई नहीं जानता था। विरोध और संदेह के बावजूद, निधि यह साबित करने पर अडिग रहती है कि सुजीत सुदीप का खून है।

सुदीप के गुजरने के बाद, निधि को उसकी एक रिकॉर्डेड ऑडियो क्लिप मिलती है, जिसमें वह अपनी आखिरी ख्वाहिश व्यक्त करता है—कि निधि उसकी मृत्यु के बाद भी उसके नाम का सिंदूर लगाए और उसकी पत्नी की तरह जीवन बिताए। निधि इस इच्छा को उसी रात पूरी करती है।
कुछ दिन बाद, वकील की उपस्थिति में सुदीप की वसीयत पढ़ी जाती है, जिसमें उसकी सारी संपत्ति निधि और उसके बाद सुजीत के नाम की जाती है, और निधि से कहा जाता है कि वह उसकी विधवा नहीं बल्कि सुहागन की तरह इस घर में रहे। यह सब सुनकर सुदीप की माँ निधि को अपनाती है और अपने पोते को गले लगाती है। यह क्षण एक रिश्ते के खोने के दर्द के साथ-साथ नए अपनत्व और स्वीकृति के सुख को भी दर्शाता है।

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