शब्दों में संवेदना का दरवाज़ा :”मुझ में भी रहता है इकतारा”
डॉ. तारा गुप्ता द्वारा लिखित गज़ल संग्रह मुझ में भी रहता है इकतारा दिल और दिमाग के बीच बहते उस पुल की तरह है, जिस पर चलते हुए पाठक जीवन, संवेदना, अनुभव और दर्शन सभी को साथ लेकर आगे बढ़ता है. कुल 70 ग़ज़लें, 36 मुक्तक और 35 दोहे इस संग्रह को विविधता से भरते हैं और पाठक को एकरसता से दूर रखते हैं.
