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साहित्यिक चमत्कार

हित्य में अब चमत्कारों की कोई कमी नहीं रही। कुछ लेखक तो इतने पारंगत हो गए हैं कि बीस कहानियों को छह अलग-अलग पुस्तकों में बाँटकर छाप देते हैं—हर पुस्तक में पाँच कहानियाँ कॉमन! और जब यह भी कम पड़ता है तो बालकथा और कविता की पतली-पतली किताबें छपवाकर अपने खाते में पुस्तकों की संख्या बढ़ा लेते हैं।पाठक भी भाग्यशाली होते हैं—उन्हें एक ही कहानी पाँच–छह बार, अलग-अलग शीर्षकों से पढ़ने का अवसर मिलता है।

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