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ससुर ने जेठानी और देवरानी के विवाद में सुनाया बड़ा फैसला

कमाऊ बहू 

कमाऊ बहू के आने के बाद घर में जेठानी और देवरानी के बीच बढ़ता भेदभाव आखिरकार टकराव में बदल गया। जब ललिता के सब्र का बाँध टूटा तो ससुर ने परिवार के सामने ऐसा फैसला सुनाया, जिसने रिश्तों की असली तस्वीर सामने ला दी।

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"भारतीय ग्रामीण आँगन में एक वृद्ध सास अपनी नवविवाहिता बहू को स्नेहपूर्वक गले लगाते हुए। बहू लाल दुल्हन के परिधान में है और दोनों की आँखों में भावुकता झलक रही है। पारंपरिक विवाह की सजावट, गेंदे के फूल और गोधूलि की सुनहरी रोशनी इस माँ-बेटी जैसे रिश्ते की आत्मीयता को दर्शा रही है।"

अनोखा रिश्ता

पति के विश्वासघात के बाद जब रीना का संसार उजड़ जाता है, तब उसकी सास शांता उसे अकेला नहीं छोड़ती। वह बहू को बेटी का दर्जा देकर अपनी पूरी संपत्ति उसके नाम करने का निर्णय लेती है। यह लघुकथा बताती है कि खून से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और अपनत्व से रिश्ते बनते हैं।

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अलमारी में टंगे रंग-बिरंगे लेहंगे को देखती एक भारतीय महिला, शादी और पारिवारिक यादों में खोई हुई, भावनात्मक और यथार्थवादी दृश्य।

रिश्ते

खुश्बू गोयल, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) वो लेहंगा, जो भैया की शादी में लिया था,उसकी भी बड़ी अजीब कहानी है। जब भी अलमारी खोलूँ,माँ को बस वही नज़र आता है,और हर बार की तरहउनका कहना शुरू हो जाता है “इतना भारी लेहंगा क्यों लिया था,जब तुझे पहनना ही नहीं था?” बस एक बार भैया की शादी…

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नई बहू का गृह प्रवेश, पारंपरिक वेशभूषा में सास आरती की थाली लिए स्वागत करती हुई

बहू रानी

यह कहानी एक माँ के मन के द्वंद्व, बेटे के अचानक विवाह और बहू के आगमन की भावनात्मक यात्रा को दर्शाती है। रिश्तों की खटास और मिठास के बीच अंततः प्रेम और स्वीकार्यता की जीत होती है।

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लोहड़ी

“लोहड़ी” लघुकथा में प्रेम, मानवता और त्यौहार का सुंदर संगम है। बहु के प्रेम और समझ से सासू माँ का दिल बदलता है, और पर्व स्नेह का प्रतीक बन जाता है।

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