Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

मन के अहाते का पेड़

कृष्णा तिवारी कृति, प्रसिद्ध लेखिका, नागदा जंक्शन (मध्यप्रदेश) खलिश काएक पेड़ लगा हैमन के अहाते मेंखटकता है सुनापनकाश..उसकी फुनगी पर भीकलियाँ आती..पतझड़ के बाद बसंतफिर सावन,बस,, यही सावन..राखी का….नयनों को और सावन कर जातापल्लू में बंधे आशीषधरातें कभी दुआए देहरी परसुनें पेड़ का मनआसमान हों जातावो फल भरी डालियाँझुमती है मन के अहाते मेंमगर दूसरे…

Read More

स्त्री है त्रिशक्ति

स्त्री वास्तव में त्रिशक्ति का प्रतीक है—वह शारदा की ज्ञानमयी छवि है, शिवा की त्याग और साहस भरी ऊर्जा है और श्री की समृद्धि और करुणा से भरपूर है। उसका स्वरूप कभी पीपल की ठंडी छाँव-सा शीतल है तो कभी सावन की झड़ी-सा तरल और जीवनदायी। ठिठुरती सर्दियों में वह गुनगुनी धूप बन जाती है। सृष्टि की शुरुआत भी उसी से होती है और अंत भी उसी में समाया हुआ है।

Read More

बारह मासा 

“चैत्र की चपलता और बैसाख की तपिश से लेकर सावन की झूलों वाली हरियाली और भादो के घने बादलों तक, यह काव्य भारतीय मासों का रंगीन चित्र प्रस्तुत करता है। इसमें ऋतुओं के बदलते रंग, प्रकृति का सौंदर्य और ग्रामीण जीवन की सहज लय एक साथ बुनी गई है, जो पाठक को पूरे वर्ष के मौसम सफर पर ले जाती है।”

Read More

हरियाली तीज : हरियाली, सौंदर्य और आस्था का पर्व

श्रावण मास की हरियाली और वर्षा ऋतु की ताजगी के बीच मनाया जाने वाला हरियाली तीज पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नारी शक्ति, सौंदर्य और सांस्कृतिक समृद्धि का उत्सव भी है। भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की स्मृति में मनाए जाने वाले इस पर्व में महिलाएँ निर्जला व्रत रखती हैं, पारंपरिक श्रृंगार करती हैं, लोकगीतों की स्वर लहरियाँ बिखेरती हैं और झूले की लय में प्रकृति से जुड़ती हैं। इस दिन महिलाएँ हरे रंग के वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेंहदी रचाती हैं, सोलह श्रृंगार करती हैं और पारंपरिक आभूषणों से सजती हैं। हरे रंग को इस पर्व का विशेष रंग माना जाता है, जो हरियाली, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक है। महिलाएँ एक-दूसरे के घर जाकर लोकगीत गाती हैं, पारंपरिक नृत्य करती हैं और झूले झूलती हैं, जो सावन के इस त्योहार की एक विशिष्ट पहचान है।

Read More

सावन में जरूरी है सात्विक भोजन

सावन केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी विशेष होता है। इस महीने सात्विक भोजन अपनाना न केवल शिव आराधना में सहायक है बल्कि शरीर को हल्का, मन को शांत और आत्मा को निर्मल रखने का एक माध्यम भी है। इस बार सावन में सिर्फ आस्था नहीं, स्वास्थ्य की भी रक्षा करें — सात्विक जीवन अपनाएं।

Read More

घनघोर घटा सावन की…

“सावन जब अपने पूरे श्रृंगार में होता है, तब हर डाल झूमती है, हर कोना भीगता है — लेकिन एक बेटी के मन का कोना तब भी सूना रह जाता है जब वह बाबुल के आंगन से दूर होती है। अमराइयों की डालियाँ झूलों से भर जाती हैं, लेकिन उसकी आँखों में झूले पीहर की यादों के बनते हैं। मेघा की हर गर्जना में वह अपनी माँ की पुकार सुनती है, और हर रिमझिम बूँद में अपने बचपन की हँसी। सावन, जो बाकी दुनिया के लिए उल्लास है, एक बेटी के लिए कभी-कभी वेदना की धूप-छाँव भी बन जाता है।”

Read More

पुराना बरगद का पेड़ 

रिक्त लटका झूला सावन में,
पुराने बरगद के पेड़ में,
ताक रहा है राह को —
ना जाने कब आएंगी बेटियाँ।
पूछ रहा है वो पुराना बरगद का पेड़ —
अब सावन में क्यों नहीं आतीं हैं बेटियाँ?

Read More

बूंदों के नूपुर

अम्बर चमके दामिनी, रिमझिम पड़े फुहार, सोंधी माटी की महक से भीगता देहात, सावन की झूले झूलती सखियाँ, बादलों संग गूंजता बूंदों का संगीत — यह कविता मानसून के सौंदर्य, ग्रामीण जीवन के उल्लास और प्रकृति की रूमानी छवि को भावपूर्ण रूप में प्रस्तुत करती है।

Read More