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अँधेरी रात में टिमटिमाते तारे, नदी किनारे अकेली नाव और दूर जलता एक दीपक, उम्मीद का प्रतीक।

सपने सिसक रहे हैं

‘सपने सिसक रहे हैं’ एक ऐसी भावपूर्ण कविता है, जो कठिन समय, टूटते सपनों और भीतर बची उम्मीद की लौ को शब्द देती है। यह कविता याद दिलाती है कि अँधेरी रात चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो, हर अस्त के बाद एक नया सवेरा अवश्य आता है।

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