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बसेरा

‘बसेरा’ एक संवेदनशील लघुकथा है, जिसमें पेड़ और चिड़ियों के संवाद के माध्यम से विकास और विनाश के द्वंद्व को उकेरा गया है। यह कथा प्रकृति, सह-अस्तित्व और मानवीय हस्तक्षेप के कारण उजड़ते आश्रयों की पीड़ा को अत्यंत मार्मिक ढंग से सामने लाती है।

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वह अफ़साना…

अश्विन सर, मुझे लेकर, कहां जा रहे हैं ? और क्यों ? छोटा शहर है, किसी ने मुझे इनके साथ देख लिया तो न जाने मेरे बारे में क्या सोचेगा ।
सर, ने मुझे एक एंप्लॉय से ज्यादा दोस्त समझा, मुझ पर विश्वास किया, और अपनी कुछ ऐसी बातें शेयर की जो वह शायद किसी और से कह नहीं सकते थे….. लेकिन उन्होंने जो कहा उसे सुनकर मैं सकते में आ गई …….. दोस्त समझा तो सही सलाह देना मेरा फर्ज था

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लिहाफ़ : कहानी जो सुनी थी…

पूस की रात, पतले लिहाफ़ और भूख से जूझते एक परिवार की कहानी में ठंड, गरीबी और संघर्ष के बीच भी उम्मीद की रोशनी झलकती है। जब रिक्शा चला कर लाया गया आटा-दाल और मुनिया की मुस्कान से ढेबरी से ज़्यादा रौशनी उनकी झोपड़ी में फैलती है, तो यह कहानी केवल ठंड की नहीं, जुगत और जज़्बे की भी बन जाती है।

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