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महाकाल महालोक में भगोरिया नृत्य की प्रस्तुति

महाकाल की नगरी में लोक–आस्था का महासंगम

उज्जैन के श्री महाकाल महालोक में चल रहे महाकाल महोत्सव के दूसरे दिन भगोरिया, गोंड और बैगा लोकनृत्यों ने शिव भक्ति को जनजातीय उत्सव में बदल दिया। डमरू की गूंज, लोक-संस्कृति और सुरों ने पूरे महालोक को शिवमय कर दिया।

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शिव

यह कविता शिव महिमा का अनुपम वर्णन है, जिसमें सदाशिव की अनंत महिमा, करुणा, दया और प्रेम का भावपूर्ण चित्रण किया गया है। शिव केवल तीनों लोकों के स्वामी ही नहीं बल्कि भक्तों के उद्धारक भी हैं। डमरू की ध्वनि से गुंजित, दूध और जल की धार से पूजित, सदाशिव का प्रत्येक रूप श्रद्धा से भरा हुआ है। शिव शंभू न केवल काशी के वासी हैं बल्कि हर कण में विद्यमान हैं। उनका भस्म रमाया रूप, सर्पों का हार, नंदी पर विराजमान स्वरूप—सभी जीवन के हर क्षण में शांति और शक्ति का संचार करते हैं।

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शिवालय

परम धाम शिवालय है, ऊर्जा से भरपूर सकारात्मकता का पुंज। शिवलिंग पर गंगाजल अर्पण, पंचोपचार पूजा और ॐ के जाप से होता कल्याण। श्रावण मास में भक्तों का शिवालय में उमड़ता हुजूम, हर हर महादेव के जयकारे गूंजते हैं। महादेव को सिर्फ एक लोटा जल प्रसन्न कर देता है।”

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