Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

माया का जाल और आत्मा की उड़ान

जैसा कि वेद-पुराणों में वर्णित है कि चौरासी लाख योनियों में भटकने के पश्चात् मनुष्य जीवन की प्राप्ति होती है। कहा गया है “जनमत मरत दुःसह दुख होई।”
प्राणी जब एक बार जन्म लेता है और मरता है, तब लाखों बिच्छुओं के डसने जैसी पीड़ा सहनी पड़ती है। बड़े सत्कर्मों के फलस्वरूप विवेकशील प्राणी मानव रूप में इस नश्वर जगत में जन्म लेता है।

Read More