एक पेड़, दो तस्वीरें और दर्द
एक पेड़ को बचाने के लिए घर की गैलरी की बनावट बदलने वाले परिवार की कहानी. बंसीलाल परमार की दो तस्वीरें प्रकृति प्रेम, संरक्षण और एक पेड़ के ठूंठ बन जाने की पीड़ा बयां करती हैं.

एक पेड़ को बचाने के लिए घर की गैलरी की बनावट बदलने वाले परिवार की कहानी. बंसीलाल परमार की दो तस्वीरें प्रकृति प्रेम, संरक्षण और एक पेड़ के ठूंठ बन जाने की पीड़ा बयां करती हैं.
लकड़ी का सम्मेलन’ एक सशक्त समकालीन हिंदी कविता है, जिसमें सभ्यता, पर्यावरण और मनुष्य के पाखंड पर तीखा व्यंग्य किया गया है। कविता बताती है कि पेड़ों की रक्षा के भाषण अक्सर उन्हीं लकड़ियों के बीच दिए जाते हैं, जिनकी देह कभी जंगल हुआ करती थी।