परीक्षा केंद्र के बाहर सुरक्षा जांच से गुजरते भारतीय विद्यार्थी, जिनके चेहरों पर चिंता, उम्मीद और आत्मसम्मान के भाव दिखाई दे रहे हैं।

सपनों पर चलती लाठियाँ

यह कविता उन विद्यार्थियों की पीड़ा और संघर्ष को स्वर देती है, जो सपनों और उम्मीदों का बोझ लेकर शिक्षा के मंदिरों तक पहुँचते हैं, लेकिन कई बार सम्मान के बजाय संदेह और कठोरता का सामना करते हैं। कविता शिक्षा व्यवस्था, अनुशासन और संवेदनशील संवाद के बीच संतुलन की आवश्यकता पर गहरा प्रश्न उठाती है।

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गुरु पूर्णिमा पर ज्ञान का दीप जला, रिश्तों की लौ दमक उठी”

विद्यालय में आयोजित गुरु पूर्णिमा समारोह ज्ञान, श्रद्धा और समर्पण का अनुपम संगम बन गया। संस्कृत नाट्य प्रस्तुति, गीता श्लोकों का पाठ, ध्यान सत्र और गुरु पूजन जैसे आयोजनों ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई दी। मुख्य अतिथि एसडीएम श्री बृजेश सक्सेना एवं हार्टफुलनेस टीम की उपस्थिति ने इस अवसर को और भी गरिमामय बना दिया। विद्यार्थियों द्वारा अपने गुरुजनों को सम्मानित कर गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया गया।

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