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सभाकक्ष में लकड़ी की मेज, कुर्सियां और बाहर खड़ा अकेला पेड़ – पर्यावरण पर आधारित हिंदी कविता 'लकड़ी का सम्मेलन' का प्रतीकात्मक दृश्य।

लकड़ी का सम्मेलन

लकड़ी का सम्मेलन’ एक सशक्त समकालीन हिंदी कविता है, जिसमें सभ्यता, पर्यावरण और मनुष्य के पाखंड पर तीखा व्यंग्य किया गया है। कविता बताती है कि पेड़ों की रक्षा के भाषण अक्सर उन्हीं लकड़ियों के बीच दिए जाते हैं, जिनकी देह कभी जंगल हुआ करती थी।

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