मैं हूँ न
‘मैं हूँ न’ एक संवेदनशील कहानी है, जो बताती है कि सच्चा प्रेम किसी की ज़िंदगी नहीं बदलता, बल्कि उसे फिर से खुद से मिलवा देता है। अकेलेपन, निराशा और टूटन से जूझते राघव को रिद्धिमा का निस्वार्थ साथ जीने की नई वजह देता है। यह कहानी उम्मीद, अपनापन और भावनात्मक सहारे की शक्ति को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है।
